लखीसराय: जिले में फाइलेरिया उन्मूलन अभियान और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने कमर कस ली है। जिला पदाधिकारी मिथिलेश मिश्र की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षा बैठक में सर्वजन दवा सेवन अभियान तथा मातृ एवं शिशु मृत्यु की स्थिति की विस्तार से समीक्षा की गई। बैठक में स्वास्थ्य विभाग सहित सभी संबंधित विभागों को स्पष्ट निर्देश दिए गए।
जिला पदाधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया से बचाव के लिए 10 फरवरी से अगले 17 दिनों तक जिले में सर्वजन दवा सेवन अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान लगभग 11 लाख लोगों को DEC, आइवरमेक्टिन और एल्बेंडाजोल की गोलियां खिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। अभियान की सफलता सुनिश्चित करने के लिए उन्होंने निर्देश दिया कि 5 और 6 फरवरी तक पंचायत स्तर से लेकर प्रखंड स्तर तक स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, जीविका तथा एससी/एसटी विकास विभाग आपसी समन्वय के साथ संयुक्त बैठक कर सभी तैयारियों को अंतिम रूप दें।
जिला पदाधिकारी ने विशेष रूप से 11 फरवरी को जीविका दीदियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने निर्देश दिया कि इस दिन जीविका दीदियां स्वयं तथा अपने परिवार के सभी सदस्यों को अनिवार्य रूप से दवा का सेवन कराएंगी, ताकि समाज में सकारात्मक संदेश जाए और आम लोगों के बीच दवा को लेकर भरोसा मजबूत हो। साथ ही उन्होंने फाइलेरिया उन्मूलन को लेकर व्यापक और प्रभावी जनजागरूकता अभियान चलाने पर भी जोर दिया।
बैठक में मातृ एवं शिशु मृत्यु के मामलों की भी गंभीर समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि आईसीडीएस विभाग 01 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 तक जिन गर्भवती महिलाओं का प्रसव अपेक्षित था, उनका सर्वेक्षण कर उनकी वर्तमान स्वास्थ्य स्थिति की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराए। इसका उद्देश्य समय रहते संभावित जोखिमों की पहचान कर आवश्यक चिकित्सीय हस्तक्षेप सुनिश्चित करना है।
मातृ मृत्यु समीक्षा के दौरान यह बात सामने आई कि कई मामलों में गर्भावस्था से जुड़े जोखिमों का न तो परिवार स्तर पर और न ही स्वास्थ्य विभाग द्वारा समय पर आकलन किया गया। इस पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए जिला पदाधिकारी ने सभी बीसीएम और प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को सख्त निर्देश दिया कि किसी भी उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिला की पहचान होते ही उसका तत्काल जोखिम आकलन किया जाए। साथ ही ऐसी महिलाओं को जरूरी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए बिना देरी किए जिला स्तर से समन्वय स्थापित किया जाए।
जिला पदाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि सुरक्षित मातृत्व सुनिश्चित करना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने सभी संबंधित विभागों से आपसी समन्वय, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के साथ कार्य करने का आह्वान किया, ताकि फाइलेरिया उन्मूलन के साथ-साथ मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में प्रभावी और स्थायी कमी लाई जा सके।
इस समीक्षा बैठक में स्वास्थ्य विभाग, आईसीडीएस, शिक्षा विभाग, जीविका, एससी/एसटी विकास विभाग सहित अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित